Religion · Tantra Mantra

Chaitra Navratri 2021 – Das Mahavidya Tantra Mantra

Jai Maa Durga

पंचांग के अनुसार 13 अप्रैल मंगलवार को चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा की तिथि से नवरात्रि का पर्व शुभारंभ होगा। पंचांग के अनुसार 13 अप्रैल को घटस्थापना की जाएगी। इस दिन घटस्थापना का मुहूर्त प्रात: 05 बजकर 28 मिनट से सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक रहेगा। नवमी की तिथि 21 अप्रैल को पड़ेगी। वहीं नवरात्रि व्रत पारण 22 अप्रैल दशमी की तिथि को किया जाएगा।

प्रथम चरित्र में महाकाली की आराधाना, द्वितीय चरित्र में महालक्ष्मी की आराधना और तृतिया चरित्र में महा सरस्वती की आराधना की गई है। प्रत्येक चरित्र में 7-7 देवियों के श्लोक का उल्लेख मिलता है।

दुर्गा सप्तशती के तांत्रिक प्रयोग में कुल 13 अध्याय दिए गए है। प्रत्येक अध्याय का अपना अलग महत्व है। आइये दुर्गा सप्तशती के तांत्रिक प्रयोग में सर्वप्रथम हम प्रत्येक अध्याय का महत्व जान लेते है-

1. प्रथम अध्याय मानसिक तनाव को दूर रखने और मन को एकाग्र रखने के लिए है।
2. दूसरा अध्याय लड़ाई-झगड़े से बचने और मुकदमे में जीत के लिए है।
3. शत्रुओं से छुटकारा पाने के लिए दुर्गा सप्तशती के तांत्रिक प्रयोग में तीसरे अध्याय की आराधना करनी चाहिए।
4. चौथा अध्याय भक्ति और शक्ति पाने के लिए है।
5. जो लोग अधिक परेशान रहते है और मंदिर आदि में भी उन्हें शांति नहीं मिलती उन्हें, दुर्गा सप्तशती के पंचम अध्याय की मदद लेनी चाहिए।
6. राहू-केतु के भारी होने और भय को दूर करने के लिए छठा अध्याय है।
7. सातवां अध्याय सभी प्रकार की मनोकामना पूर्ण करने के लिए है।
8. वशीकरण आदि प्रयोग के लिए दुर्गा सप्तशती से वशीकरण के आठवें अध्याय की मददलें।
9. नौवें अध्याय की आराधना से संतान सुख की प्राप्ति होती है।
10. किसी गुमशुदा की तलाश और अपने बच्चों को सन्मार्ग पर लगाने के लिए दशम अध्याय पढ़ना चाहिए।
11. ग्यारवां अध्याय व्यापार में लाभ और सुख-समृद्धि के लिए है।
12. समाज में मान-सम्मान पाने के लिए बाहरवां अध्याय है।
13. तेहरवा अध्याय अपनी साधना को निर्विकार पूर्ण करने के लिए है।

(1) प्रबल आकर्षण वशीकरण के लिए निम्न मंत्र का सवा लाख (125000) जप कर 12500 आहुति से हवन करें। संकल्प में नाम बोलें, कार्य होगा।

ज्ञानिनापि चेतांसि देवी भगवती हि सा,
बलादा कृष्य मोहाय महामाया प्रयच्छति।’

(नोट : पायस, तिल, घृत, इलायची, बिल्व आदि से हवन करें।)


(2) यदि सामने बलवान शत्रु हो तथा जिसका पार न पड़ रहा हो, उसे पराजित करने के लिए मंत्र जप कर दशांस होम, तिल, सरसों से करें।

क्षणेन तन्महासैन्यंसुराणां तथा अम्बिका,
निन्ये क्षयं यथा वह्निस्तृणदारू महाचयम।’

या

गर्ज गर्ज क्षणं मूढ़ मधु यावत पिबाम्यहम्,
मया त्वयि हतेऽत्रैव गर्जिष्यान्तु देवता:।’

(हवनादि उपरोक्त तरीके से करें।)


(3) बड़े शत्रुओं को भयभीत करने के लिए निम्न मंत्र का उपरोक्त तरीके से जप करें।

‘इत्युक्त: सोऽभ्यघावत् तामसुरो धूम्रलोचन:।
हुंकारेणैव तं भस्म सा यकाराम्बिका तत:।’


(4) दु:ख-दारिद्र्य निवारण के लिए निम्न मंत्र जपें तथा पायस, बिल्वपत्र की आहुति दें।

‘दुर्गेस्मृता हरसि भीतिम शेष जन्तौ:,
स्वस्‍थै:स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि:।
दारिद्र्य दुख:हारिणी का त्वदन्या,
सर्वोपकार कारणाय सदार्द्र चित्रा।।’


(5) पद प्राप्ति या अधिकार प्राप्ति के लिए निम्न मंत्र जपें तथा घृत, तिल, जौ आदि से हवन करें। विशेष यह मंत्र छोटा है।

‘हत्वा रिपुनस्खलितं तव तत्र भविष्यति।’


(6) रोगनाश, असाध्य बीमारी के लिए यह मंत्र महामृत्युंजय मंत्र की तरह कार्य करता है। सरसों, कालीमिर्च, जायफल, गिलोय, नीम, आंवला, राई, तिल, जौ आदि से दशांस आहुति दें। बड़े रोगों में सवा लाख जपें-

मंत्र-

रोगानशेषानपहंसि तुष्टा,
ददासि कामान् सकलान भीष्टान्।
त्वामाश्रितानां न विपन्नराणां,
त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयन्ति।।’

उपरोक्त मंत्र श्रद्धा व विश्वास के साथ जपें तथा माता दुर्गा की यथाशक्ति पूजा करें। 10 हजार जप कर दशांस हवन करने से मंत्र सिद्ध हो जाएगा। नित्य 1 माला करने से वह समस्या दोबारा नहीं होगी। पूजा-प्रतिष्ठा किसी योग्य ब्राह्मण से समझ लें। इति।

महादेवियों के रूप-

१. मां भद्रकाली

मां काली 10 महाविद्याओं में से एक है या देवी का शक्ति स्वरूप है यह संहार की देवी मानी जाती है इनका यह रूप लेने की वजह दैत्यों का विनाश करना था मां भद्रकाली की समस्त भारत में आराधना की जाती है यह काल की छवि के रुप में जानी जाती जाती है इनके द्वारा अनेक इनकासिद्धियां तंत्र साधनाएं करने पर विशेष महत्व है ।

२. माँ तारा

मां तारा को सर्व सिद्धि का कारक माना जाता है यह यह सूर्य से प्रकट हुई थी इनकी साधना करने वाले व्यक्ति सभी समस्याएं समाप्त हो जाती हैं और उसका कभी कोई शत्रु नहीं होता और उसको उसकी सभी इच्छाओं को पूर्ण होने में समय नहीं लगता या केंद्र की देवी है समानता वह पूर्ण ब्रह्मांड की स्वामिनी है।

“ऐं स्त्रीं ॐ ऐं ह्रीं फट् स्वाहा ।”

३- माँ ललिता

मां ललिता प्रकाश की देवी है या दूध की तरह उज्जवल रूप वाली है देवी की दो भुजाएं हैं इनकी पूजा पद्धति ललितशास्त्री ललितासहस्त्रनाम आदि है यह संपूर्ण फलों की प्राप्ति का वर देती है ।

ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं सौ: ॐ ह्रीं श्रीं क ए ई ल ह्रीं ह स क ह ल ह्रीं सकल ह्रीं सौ: ऐं क्लीं ह्रीं श्रीं नम:।

४- माँ भुवनेश्वरी

माता भुनेश्वरी ऐश्वर्या की देवी है यह प्रजापालक भावनाओं की प्रतीक मानी जाती हैं विश्व हित के लिए उपासना की जाती है इनके नक में ब्रह्मांड का दर्शन होता है उनका चेहरा सूर्य की तरह लालिमा युक्त है इनके बीज मंत्र का जप करने से सभी सिद्धियां प्राप्त होती है

ह्नीं भुवनेश्वरीयै ह्नीं नम:’

५- मां भैरवी

मां भैरवी गले में मुंड माला धारण किए तथा अपने हाथों में कमल धारण किए हुए हैं मां लाल वस्त्र से सुशोभित भक्तों की हर इच्छाओं की पूर्ति करने के लिए हमेशा तत्पर रहती है ।

ह्नीं भैरवी क्लौं ह्नीं स्वाहा:।

६- माँ छिन्नमस्तिका

पुराणों में मां छिन्नमस्तिका का वर्णन शिव की आदिशक्ति के रूप में है इसके अनुसार चंडी का रूप धर माँ राक्षसों का संघार किया था परंतु देवी मां की सहयोगियो जया विजया की रक्त की प्यास शांत नहीं हुई तब मां ने स्वयं का सर काटकर उनकी प्यास भुझाई थी

श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं वज्र वैरोचनीयै हूं हूं फट् स्वाहा 

७-माँ धूमावती –

मां धूमावती का स्वरूप अत्यंत भयानक प्रतीत होता है पर या बिल्कुल विपरीत है धूमावती की साधना करने से अभीष्ट फल की प्राप्ति होती है यह संघार की देवी है इनकी पूजा ऋषि दुर्वासा भ्रगु परुशराम ने की थी और जीवन भर करते रहे धूमावती का स्वरुप अत्यंत भयानक है यह तंत्र मंत्र की देवी है या अपने भक्तों के शत्रुओं को समाप्त कर देती है

धूं धूं धूमावती ठ: ठ:. धूम्रा मतिव सतिव पूर्णात सा सायुग्मे.

८- माँ बगलामुखी

मां बंगलामुखी अत्यंत शक्तिशाली माता है उनका एक नाम पीतांबरा भी है इनकी आराधना पीले वस्त्र पहनकर ही की जाती है यह शत्रुओं को क्षण भर में नष्ट कर देती है मां बगलामुखी शत्रुओं का नाश वशीकरण तंत्र मंत्र की स्वामी है इनको साधना द्वारा प्रसन्न किया जा सकता है और उनसे मनवांछित फल की प्राप्ति की जा सकती है

ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय बुद्धि विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा।

९- माँ मातंगी

मां मातंगी नवी महाविद्या है यह संगीत की देवी कही जाती है इनकी आराधना से दांपत्य जीवन में सुख यश की प्राप्ति होती है इनको दीर्घकाल तक तपस्या कर ही प्रसन्न किया जा सकता है

१०- माँ कमला

मां कमला का स्वरूप अत्यंत मोहकारी एवं इनका वर्ण सोने जैसी दिखाई देता है मां की साधना करने वाला व्यक्ति कभी निर्धन नहीं होता या माँ की साधना से विद्वान एवं धनी बनाने का आशीर्वाद देती हैं इनकी साधना करने वाला व्यक्ति चारों दिशाओं में अपने यश का संचार करता है

ॐ ह्रीं हूं क्षों ग्रें क्रौं नमः

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