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आज से होलाष्टक शुरू, शुभ कार्य वर्जित

Holika

होलाष्टक यानि होली से 8 दिन पूर्व शुरू होने वाला समय, जिसे विशेषकर उत्तर भारत में अशुभ समय माना जाता है। इन 8 दिनों के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन समेत सभी प्रकार के मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं। होलाष्टक फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू होकर फाल्गुन शुक्ल पक्ष पूर्णिमा तक प्रभावी रहते हैं। होलिका दहन के साथ ही होलाष्टक समाप्त हो जाते हैं। इस साल होलाष्टक 23 फरवरी 2018 से शुरू होंगे और 1 मार्च 2018 को समाप्त हो जाएंगे। इसी दिन से होली उत्सव के साथ-साथ होलिका दहन की तैयारियां भी शुरू हो जाती हैं। होलाष्टक के शुरुआती दिन में ही होलिका दहन के लिए 2 डंडे स्थापित किये जाते हैं। जिसमें से एक को होलिका तथा दूसरे को प्रह्लाद माना जाता है।

 

क्यों वर्जित होते हैं होलाष्टक में शुभ कार्य

हिन्दू धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के परम भक्त प्रह्लाद को राक्षस हिरण्यकश्यप ने होलिका दहन से पूर्व 8 दिनों तक अनेक प्रकार के कष्ट दिये थे। तभी से भगवान की भक्ति पर प्रहार के इन 8 दिनों को हिन्दू धर्म में अशुभ माना गया है। इस अवधि में विशेष रूप से विवाह, नये मकान का निर्माण, नये व्यवसाय की शुरुआत आदि मांगलिक कार्य नहीं करना चाहिए। क्योंकि इन 8 दिनों में किये गये कार्यों से कष्ट, विवाह में संबंध विच्छेद और कलह की संभावना होती है।

ज्योतिषीय मत

वैदिक ज्योतिष में भी होलाष्टक को अशुभ बताया गया है। इस दौरान अष्टमी को चंद्रमा, नवमी को सूर्य, दशमी को शनि, एकादशी को शुक्र, द्वादशी को गुरु, त्रयोदशी को बुध, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु उग्र स्वभाव में रहते हैं। इन अष्ट ग्रहों के क्रोधी स्वभाव का बुरा असर मानव जीवन पर पड़ता है। जिन लोगों की जन्म कुंडली में नीच राशि के चंद्रमा यानि वृश्चिक राशि के जातक या चंद्रमा जिनकी कुंडली में छठे या आठवें भाव में है उन्हें इन दिनों अधिक सतर्क रहना चाहिए।

होलाष्टक में दान और व्रत का महत्व

होलाष्टक में जहां शुभ कार्यों को करने की मनाही होती है। वहीं व्रत और दान-पुण्य के कार्यों का महत्व होता है। इन 8 दिनों में किये गये व्रत और दान से जीवन के कष्टों से मुक्ति मिलती है और भगवान की असीम कृपा प्राप्त होती है। इन दिनों में वस्त्र, अनाज और अपनी इच्छानुसार धन आदि का दान करना चाहिए।
देश के कई हिस्सों में होलाष्टक नहीं माने जाते हैं। लोक मान्यता के अनुसार कुछ तीर्थ स्थान जैसे- शतरुद्रा, विपाशा, इरावती और पुष्कर सरोवर के अलावा बाकी सभी स्थानों पर होलाष्टक का अशुभ प्रभाव नहीं होता है इसलिए अन्य स्थानों पर विवाह आदि शुभ कार्य बिना किसी परेशानी के हो सकते हैं। फिर भी शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक की अवधि में शुभ कार्य निषेध होते हैं इसलिए हमें भी इनसे बचना चाहिए।
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