Religion

अभ्यंग स्नान मुहूर्त – नरक चतुर्दशी 2017

Narak Chaturdashi

पांच दिन दिवाली उत्सव धन्त्रोधीशी पर शुरू होता है और भाई दूज दिवस पर रहता है। दीवली के दौरान चतुर्दशी, अमावस्या और प्रतिपदा दिवसों पर अभयंग स्नान का सुझाव दिया गया है।चतुर्दशी दिन पर अभ्यंग स्नान, जिसे नारक चतुर्दशी के रूप में जाना जाता है, सबसे महत्वपूर्ण है। ऐसा माना जाता है कि लोग, जो आज के दिन अभयंग स्नान करते हैं, नरक जाने से बच जाते हैं। अभयंग स्नान के दौरान तिल (यानी तिल) का उपयोग उबटन के लिए किया जाना चाहिए।

नरक चतुर्दशी पर अभयंग स्नान अंग्रेजी दिन कैलेंडर पर एक दिन पहले या लक्ष्मी पूजा दिवस पर हो सकता है। जब चतुर्दशी तिथी सूर्योदय से पहले होती है और अमावस्या तिथी सूर्यास्त के बाद होती है तो उसी दिन नारक चतुर्दशी और लक्ष्मी पूजा आती है। अभयंग स्नान हमेशा चंद्रमा के दौरान किया जाता है, लेकिन सूर्योदय से पहले चतुर्दशी तीथी प्रचलित है।

इस दिन यमराज की पूजा करने और व्रत रखने का व‍िधान है. ऐसी मान्‍यता है कि इस दिन जो व्‍यक्ति सूर्योदय से पूर्व अभ्‍यंग स्‍नान यानी तिल का तेल लगाकर अपामार्ग (एक प्रकार का पौधा) यानी कि चिचिंटा या लट जीरा की पत्तियां जल में डालकर स्नान करता है, उसे यमराज की व‍िशेष कृपा म‍िलती है. नरक जाने से मुक्ति म‍िलती है और सारे पाप नष्‍ट हो जाते हैं. स्‍नान के बाद सुबह-सवेरे राधा-कृष्‍ण के मंदिर में जाकर दर्शन करने से पापों का नाश होता है और रूप-सौन्‍दर्य की प्राप्ति होती है. माना जाता है कि महाबली हनुमान का जन्म इसी दिन हुआ था इसीलिए बजरंगबली की भी विशेष पूजा की जाती है.

मान्‍यता के अनुसार नरक चतुर्दशी के दिन भगवान हनुमान ने माता अंजना के गर्भ से जन्‍म लिया था. इस दिन भक्‍त दुख और भय से मुक्ति पाने के लिए हनुमान जी की पूजा-अर्चनाा करते हैं. इस दिन हनुमान चालीसा और हनुमान अष्‍टक का पाठ करना चाहिए.

अभ्यंग स्नान मुहूर्त  04:47 से 06:27

अवधि = 1 घंटे 40 मिनट

चतुर्दशी तीथी शुरुआती = 00:08 18 / अक्टूबर / 2017

चतुर्दशी तीथी समाप्ति = 00:13 पर 1 9 / अक्टूबर / 2017

नरक चतुर्दशी दिन को छोटी दीवाली, रूप चतुर्दशी और रूप चौदास के रूप में भी जाना जाता है।अक्सर नरक चतुर्दशी को काली चौदास के रूप में माना जाता है। हालांकि दोनों एक ही तिथी पर मनाए गए दो अलग-अलग त्योहार हैं और चतुर्दशी तीथ की शुरुआत और समाप्ति समय के आधार पर लगातार दो अलग-अलग दिनों में गिर सकता है।

नरक चतुर्दशी के दिन पूजा करने की व‍िध‍ि
 नरक से बचने के लिए इस दिन सूर्योदय से पहले शरीर में तेल की मालिश करके स्‍नान किया जाता है.
 स्‍नान के दौरान अपामार्ग की टहनियों को सात बार सिर पर घुमाना चाहिए.
 टहनी को सिर पर रखकर सिर पर थोड़ी सी साफ मिट्टी रखें लें.
 अब सिर पर पानी डालकर स्‍नान करें.
 इसके बाद पानी में तिल डालकर यमराज को तर्पण दिया जाता है.
 तर्पण के बाद मंदिर, घर के अंदरूनी हिस्‍सों और बगीचे में दीप जलाने चाहिए.

यम तर्पण मंत्र
यमय धर्मराजाय मृत्वे चान्तकाय च |
वैवस्वताय कालाय सर्वभूत चायाय च ||

नरक चतुर्दशी के बारे में एक अन्य मान्यता है कि इस रात घर के बाहर दिए जलाकर रखने से यमराज प्रसन्न होते हैं और अकाल मृत्यु टल जाता है। एक कथा के अनुसार इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था।

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