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माता काली – अज्ञानता को नष्ट करने वाली हिंदू देवी

Maa Kali

काली हिंदू धर्म में विनाश और विघटन की देवी है, और वह भारत में सबसे लोकप्रिय देवी हैं। काली को अज्ञानता को नष्ट करने के लिए जाना जाता है, और वह उन लोगों की मदद करती है जो परमेश्वर के ज्ञान के लिए प्रयास करते हैं। उसका नाम “द ब्लैक वन” और जिनके सम्मान में कोलकत्ता का नाम रखा गया है। काली को पार्वती का एक द्वेषपूर्ण रूप माना जाता है काली का नाम भी संस्कृत का एक रूप है “काला” जिसका अर्थ है “समय”। वह कुछ हिंदू देवताओं में से एक है, जिन्हें रक्त बलिदान अभी भी बना है।

देवी अंबिका ने दानव रक्तबीज के खिलाफ लड़ाई में आठ मातृकास का नेतृत्व किया – नरसिंही, वैष्णवी, कुमारी, महेश्वरी, ब्राह्मी, वाराही, ऐंध्री, चामुंडा या काली (राक्षस का रक्त पीते हुए)।

दैत्य रक्तबिज ने कठोर तप के बल पर वर पाया था की अगर उसके खून की एक बूंद भी धरती पर गिरेगी तो उस से अनेक दैत्य पैदा हो जाएंगे। उसने अपनी शक्तियों का प्रयोग निर्दोष लोगों पर करना शुरू कर दिया। धीरे धीरे उसने अपना आतंक तीनों लोकों पर मचा दिया। देवताओं ने उसे युद्ध के लिए ललकारा। भयंकर युद्ध का आगाज हुआ। देवता अपनी पूरी शक्ति लगाकर रक्तबिज का नाश करने को तत्पर थे मगर जैसे ही उसके शरीर की एक भी बूंद खून धरती पर गिरती उस एक बूंद से अनेक रक्तबीज पैदा हो जाते।

सभी देवता मिल कर महाकाली की शरण में गए। मां काली असल में सुन्दरी रूप भगवती दुर्गा का काला और डरावना रूप हैं, जिनकी उत्पत्ति राक्षसों को मारने के लिए ही हुई थी। महाकाली ने देवताओं की रक्षा के लिए विकराल रूप धारण कर युद्ध भूमी में प्रवेश किया। मां काली की प्रतिमा देखें तो देखा जा सकता है की वह विकराल मां हैं। जिसके हाथ में खप्पर है,लहू टपकता है तो गले में खोपड़ीयों की माला है मगर मां की आंखे और ह्रदय से अपने भक्तों के लिए प्रेम की गंगा बहती है।

महाकाली ने राक्षसों का वध करना आरंभ किया लेकिन रक्तबीज के खून की एक भी बूंद धरती पर गिरती तो उस से अनेक दानवों का जन्म हो जाता जिससे युद्ध भूमी में दैत्यों की संख्या बढ़ने लगी। तब मां ने अपनी जिह्वा का विस्तर किया। दानवों का एक बूंद खून धरती पर गिरने की बजाय उनकी जिह्वा पर गिरने लगा। वह लाशों के ढेर लगाती गई और उनका खून पीने लगी। इस तरह महाकाली ने रक्तबीज का वध किया लेकिन तब तक महाकाली का गुस्सा इतना विक्राल रूप से चुका था की उनको शांत करना जरुरी था मगर हर कोई उनके समीप जाने से भी डर रहा था।सभी देवता भगवान शिव के पास गए और महाकाली को शांत करने के लिए प्रार्थना करने लगे। भगवान् शिव ने उन्हें बहुत प्रकार से शांत करने की कोशिश करी जब सभी प्रयास विफल हो गए तो वह उनके मार्ग में लेट गए। जब उनके चरण भगवान शिव पर पड़े तो वह एकदम से ठिठक गई। उनका क्रोध शांत हो गया। आदि शक्ति मां दुर्गा के विविध रूपों का वर्णन मारकण्डेय पुराण में वर्णित है।

उसके (दुर्गा) के माथे की सतह से, भद्दे के साथ भयानक, अचानक काली की भयानक मुठभेड़ हुई, जो तलवार और फंदा से सशस्त्र थी। अजीब खतवंगा (खोपड़ी-टॉप स्टाफ), खोपड़ी की माला, एक बाघ की त्वचा पहने हुए, उसके क्षीण मांस के कारण बहुत ही भयावहता, मुंह के साथ, उसकी जीभ के साथ डरावने, गहरी लाल आँखें भरने, डराने वाली उसकी गर्जनों के साथ आकाश, तेज गति से गिरते हुए और उस सेना के महान असुरों को मारते हुए, उसने राक्षसों को खाया।

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माँ काली का रूप सभी देवियों में से सबसे कट्टर माना जाता है। माँ के चार हाथ है ,एक हाथ में तलवार और एक एक हाथ में राक्षस का सिर ,यह सिर एक बहुत बड़े युद्ध का प्रतिनिधित्व है जिसमें माँ ने रक्तबीजा नाम के दानव का वध किया था। बाकी के 2 हाथ भक्तो को आशीर्वाद देने के लिए है और वह कहती है “डरो मत मैं हमेशा अपने भक्तो की रक्षा करती हूँ ” .उनके पास कान की बाली के लिए दो मृत सिर है , गर्दन पर 52 खोपड़ी का एक हार, और दानव के हाथ से बना एक स्कर्ट है। उनकी जीभ उनके मुंह से बाहर रहती है और रक्त से सनी रहती है | उनकी ऑंखें लाल रहती है , और उनके चेहरे और स्तनों को खून लगा रहता है। कुछ चित्रों में वह एक पैर के साथ जांघ पे ठहरती है और दूसरा पैर अपने पति शिव के छाती पर रखती है। भगवान शिव जो निराकार जागरूकता सच्चिदानंद है और माँ काली सदा से शुद्ध का प्रतिनिदित्व करती है।

काली मां सिद्धि और पराशक्तियों की आराधना करने वाले साधकों की इष्ट देवी मानी गई हैं। लेकिन केवल तांत्रिक साधना के लिए ही नहीं अपितु आम जन के लिए भी मां काली की आराधना समान रूप से फलदायी मानी गई हैं।कई लोग मां काली का भयंकर रूप देख इनसे डरते हैं जो गलत है जबकि सत्य तो यह है कि मां काली की आराधना से मनुष्य स्वयं सभी भयों से मुक्त हो सकता है। अगर आप भी मां काली को नवरात्रों से इतर घर पर पूजने से कतराते हैं तो आइये इस लेख के माध्यम से जानें मां काली की घर पर आराधना करने से कौन-से लाभ होते हैं और कैसे घर पर मां काली की पूजा की जानी चाहिए?

घर में मां की पूजा करना बेहद आसान है। इसके लिए आप घर के मंदिर में मां काली की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसपर तिलक लगाएं और पुष्प आदि अर्पित करें। मां काली की पूजा में पुष्प लाल रंग का और कपडे काले रंग के होने चाहिए।एक आसन पर बैठकर प्रतिदिन मां काली के किसी भी मंत्र का 108 बार जप करें। काली गायत्री मंत्र या मां के बीज मंत्रों का जप करना बेहद फलदायी माना जाता है।जप के बाद प्रसाद के रूप में मां काली को भोग अवश्य अर्पण करें। अपनी इच्छा पूरी होने तक इस प्रयोग को जारी रखें। यदि आप विशेष उपासना करना चाहते हैं तो सवा लाख, ढाई लाख, पांच लाख मंत्र का जप अपनी सुविधा अनुसार कर सकते हैं।

सामान्य जातक मां को प्रसन्न करने के लिए कुछ विशेष मंत्रों का भी प्रयोग कर सकते हैं। यह मंत्र शस्त्रों में वर्णित हैं और इन्हें काफी असरदार माना जाता है। परंतु इस बात का विशेष ध्यान रखें कि मंत्रोच्चारण शुद्ध होना चाहिए और कुछ मंत्रों को विशेष संख्या में ही जपना चाहिए। ह्रीं” और “क्रीं” मंत्र का प्रयोग फलकारी माना गया है।ये दोनों एकाक्षर मंत्र है। इसे विशेष रूप से दक्षिण काली का मंत्र कहा जाता है। ज्ञान और सिद्धी प्राप्ति के लिए इस मंत्र का विशेष महत्व है। इसके अलावा घर पर प्रतिदिन “क्रीं क्रीं क्रीं स्वाहा” मंत्र का 108 बार जप करने से सभी दुखों का निवारण करके घन-धान्य की वृद्धि होती है। इसके जप से पारिवारिक शांति भी बनी रहती है।इसके अलावा द्विअक्षर मंत्र “क्रीं क्रीं” और त्रिअक्षरी मंत्र ‘क्रीं क्रीं क्रीं’ काली की साधनाओं और उनके प्रचंड रूपों की आराधनाओं का विशिष्ट मंत्र है। द्विअक्षर और त्रिअक्षरी मंत्र का प्रयोग तांत्रिक साधना मंत्र के पहले और बाद में किया जा सकता है।

दुर्गासप्तशती में वर्णित “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चै:’ मंत्र का वर्णन है जो मां के नौ स्वरूपों को समर्पित है। नवरात्र के विशेष समय पर आप इस मंत्र का जाप घर पर कर सकते हैं। इससे ग्रहों से जुड़ी समस्याएं समाप्त होती हैं।“ॐ क्रीं क्रीं क्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं स्वाहा:” मां काली को समर्पित एक बेहद शक्तिशाली मंत्र है जिसका जाप नवरात्रों के विशेष मौके पर करना चाहिए। मां काली को समर्पित कई अन्य मंत्र भी हैं लेकिन इनका प्रयोग अधिकांश तांत्रिक क्रियाओं के लिए ही होता है।

इसके अतिरिक्त आप प्रात: काल भी मां की पूजा कर सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार अगर आप प्रतिदिन नियमपूर्वक मां काली की पूजा कर रहे हैं तो हो सकता है आपको कुछ समय बाद किसी पराशक्ति का अनुभव हो जिससे घबरा ना, यह केवल एक तरह की शक्ति है जो मां की पूजा करने के कारण आपकी रक्षा के लिए उत्पन्न हुई है।

कुछ नियम मंत्र उच्चारण के लिए

1) सूर्य उदय से पहले नहा ले ।
2) स्वच्छ सफेद या नारंगी कपड़े पहनें।
3)पूजा शुरू करने से पहले आसन पे बैठे।
4) एक दीया जलाये।
5 ) फूल और मिठाई भगवान् को चढ़ाये।
6) अब गहरा और सच्चे दिल से रुद्राक्ष की माला से मंत्र का जाप करे।

देवी दुर्गा के सभी रूपों में से उग्र मां काली की घर पर पूजा करने से बेशक काफी जल्दी फल प्राप्त होता है लेकिन इनकी आराधना में कुछ विशेष बातों का अवश्य ध्यान रखना चाहिए। साफ-सफाई और शुद्धता के अलावा विशेष मुहूर्तों में मां की आराधना करने का श्रेष्ठ समय मध्य रात्रि या अमावस्या का होता है।इसके अतिरिक्त आप प्रात: काल भी मां की पूजा कर सकते हैं। शास्त्रों के अनुसार अगर आप प्रतिदिन नियमपूर्वक मां काली की पूजा कर रहे हैं तो हो सकता है आपको कुछ समय बाद किसी पराशक्ति का अनुभव हो जिससे घबरा ना, यह केवल एक तरह की शक्ति है जो मां की पूजा करने के कारण आपकी रक्षा के लिए उत्पन्न हुई है।

काली मां की आरती

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली |

तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती ||

तेरे भक्त जनों पे माता, भीर पड़ी है भारी |
दानव दल पर टूट पडो माँ, करके सिंह सवारी ||

सौ सौ सिंहों से तु बलशाली, दस भुजाओं वाली |
दुखिंयों के दुखडें निवारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती ||

माँ बेटे का है इस जग में, बड़ा ही निर्मल नाता |
पूत कपूत सूने हैं पर, माता ना सुनी कुमाता ||

सब पर करुणा दरसाने वाली, अमृत बरसाने वाली |
दुखियों के दुखडे निवारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती ||

नहीं मांगते धन और दौलत, न चाँदी न सोना |
हम तो मांगे माँ तेरे मन में, इक छोटा सा कोना ||

सबकी बिगडी बनाने वाली, लाज बचाने वाली |
सतियों के सत को संवारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती ||

अम्बे तू है जगदम्बे काली, जय दुर्गे खप्पर वाली |
तेरे ही गुण गायें भारती, ओ मैया हम सब उतारें तेरी आरती ||

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